पृष्ठ

आइये आपका हृदयतल से हार्दिक स्वागत है

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

बच्चों को समर्पित दो रचनाएं

बच्चों को समर्पित दो रचनाएं
..................................................................

प्रथम रचना : 'मत्तगयन्द' सवैया : 7 भगण व अंत में दो दीर्घ
...................................................................

नाच नचाय रहा सबको हर ओर चलाय रहा मनमानी,
चूम ललाट रही जननी जब बोल रहा वह तोतल वानी,
धूल भरे तन माटि चखे चुपचाप लखे मुसकान सयानी,
रूप स्वरुप निहार रही सब भूल गयी यह लाल दिवानी...


...................................................................
द्वतीय  रचना : कविता

मुझको नहीं होना बड़ा - वड़ा
पैरों पर अपने खड़ा - वड़ा
मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।

गोदी में सोने की हसरत मेरे जीवन से जायेगी,
माँ अपनी सुन्दर वाणी से लोरी भी नहीं सुनाएगी,
अच्छा है उम्र में कच्चा हूँ ।
मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।।

मैं फूलों संग मुस्काता हूँ, मैं कोयल के संग गाता हूँ,
चिड़िया रानी संग यारी है, मुझको लगती ये प्यारी है,
मैं मित्र सभी का सच्चा हूँ ।
मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।।

...................................................................
                    अरुन शर्मा 'अनन्त'
...................................................................

12 टिप्‍पणियां:

  1. सदा10 अप्रैल 2013 को 11:17 am

    अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने .... बहुत ही बढिया।

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. Rajendra Kumar10 अप्रैल 2013 को 11:55 am

    दोनों ही सुन्दर बाल रचनाएँ,बचपन का समय बहुत ही निराला होता है.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. रविकर10 अप्रैल 2013 को 3:09 pm

    सुन्दर प्रस्तुति-
    शुभकामनायें-

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. ranjana bhatia10 अप्रैल 2013 को 3:46 pm

    bachpan kahan bhul paate hain ..dono hi rachnaaye aapki bahut badhiya lagi arun ..sundar abhiwykti

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  5. दिगम्बर नासवा10 अप्रैल 2013 को 4:54 pm

    इन बाल रचनाओं का जवाब नहीं ...
    भई वाह ..

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  6. दिलबाग विर्क10 अप्रैल 2013 को 6:49 pm

    आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  7. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)10 अप्रैल 2013 को 8:06 pm

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    दोनों रचनाएँ बहुत बढ़िया हैं!
    साझा करने के लिए आभार!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  8. धीरेन्द्र सिंह भदौरिया10 अप्रैल 2013 को 10:03 pm

    बहुत प्रभावी मनमोहक बाल रचना !!!

    recent post : भूल जाते है लोग,

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  9. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)11 अप्रैल 2013 को 6:34 am

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    नवसम्वत्सर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  10. प्रतिभा सक्सेना11 अप्रैल 2013 को 10:01 am

    बहुत अच्छी प्रस्तुति!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  11. Brijesh Singh11 अप्रैल 2013 को 2:34 pm

    अनन्त भाई बहुत सुन्दर! मजा आ गया पढ़कर! बधाई!

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  12. Virendra Kumar Sharma11 अप्रैल 2013 को 9:28 pm

    द्वतीय रचना : कविता

    मुझको नहीं होना बड़ा - वड़ा
    पैरों पर अपने खड़ा - वड़ा
    मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।

    गोदी में सोने की हसरत मेरे जीवन से जायेगी,
    माँ अपनी सुन्दर वाणी से लोरी भी नहीं सुनाएगी,
    अच्छा है उम्र में कच्चा हूँ ।
    मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।।

    मैं फूलों संग मुस्काता हूँ, मैं कोयल के संग गाता हूँ,
    चिड़िया रानी संग यारी है, मुझको लगती ये प्यारी है,
    मैं मित्र सभी का सच्चा हूँ ।
    मैं बच्चा - बच्चा अच्छा हूँ ।।

    वाह अभिनव रंग और खुशबू लिए बच्चों को समर्पित रचना .

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
टिप्पणी जोड़ें
अधिक लोड करें...

आइये आपका स्वागत है, इतनी दूर आये हैं तो टिप्पणी करके जाइए, लिखने का हौंसला बना रहेगा. सादर